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वैदिक विद्यापीठं , चिचोट कुटी


वैदिक विद्यापीठं , चिचोट कुटी
बाबा बजरंगदास कुटी चिचोट छिपानेर जिला - हरदा
संपर्क - प्रबंधक - श्री रामवीर व्यास 09926459681
प्राचार्य - श्री गगन देवड़ा 09926345453
कक्षा ६ से 12 तक (संस्कृत विषयक शास्त्र का अध्ययन)
 
वैदिक विद्या पीठम् चिचोटकुटी
परिचय

माॅं नर्मदा के तट पर ग्राम चिचोटखेड़ा - छीपानेर, तहसील-टिमरनी, जिला हरदा (म.प्र.) के परम पूज्य श्री बाबा बजरंगदास जी महाराज एवं पूज्यश्री स्वामी तिलक जी की इच्छानुरूप, विद्या भारती एवं संस्कृत भारती मध्यभारत प्रान्त के मार्गदर्षन द्वारा, जुलाई 2014 में महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान, भोपाल से सम्बद्धता प्राप्तकर, स्वामी तिलक वैदिक समिति, चिचोट के सुसंचालन में चल रहा है । विद्यालय नित्निरंतर नयी उॅचाईयों के साथ इस वर्ष भी एक चरण ओर अग्रेसर हुआ है । जहाॅं वैदिक भाषा (संस्कृत) का संरक्षण एवं संवर्धन करते हुए अध्ययन एवं अनुसंधान की व्यवस्था हो रही है ।

आज जब पश्चिम की विज्ञान प्रयोगशालाएँ, शोधकर्ताओं के विचार और संकल्पनाएँ किसी एक स्थान पर ठहर जाती हैं, तब नई-नई संकल्पना की आशा में बड़े-बड़े वैज्ञानिक पूर्व की संस्कृति, भारतीय दर्शन और वेद वाडंग्मय का अध्ययन कर रहे हैं। वेदों में लिखे गए विज्ञान के गूढ़ रहस्य वैज्ञानिकों को अचंभित कर रहे हैं। ऐसे में वे नासा जैसे बड़े वैज्ञानिक संस्थानों में भी संस्कृत भाषा से प्रेरित व अध्ययनकर प्रवेश ले रहे हैं। पश्चिमी समाज जहाँ आशा भरी दृष्टि से हमारी ओर देख रहा है ऐसे में हमारा प्राचीन विज्ञान एवं ज्ञान के अध्ययन के लिए विगत् वर्ष में स्वामी तिलक जी महाराज की इच्छानुरूप वैदिक विद्यापीठम् की स्थापना की गई। जहाँ बालकगण आवासीय रहकर संस्कृत भाषा में सभी विषयों का अध्ययन कर रहे हैं।
आधुनिकता की आँधी में हमारा वह ज्ञान आज भी प्रासंगिक है। आवश्यकता है उसे समाधान के रूप में नए स्वरूप के साथ प्रस्तुत करने की। इसी दिशा में यह प्रकल्प प्रारम्भ हुआ है, प्रकृति की गोद में माँ रेवा की कल-कल करती धारा, हरे भरे खेत एवं पक्षियों की सुमधुर कलरव के मध्य पावन भूमि पर स्थित है- वैदिकविद्यापीठम्।

विद्याभारती एवं संस्कृत भारती के मार्गदर्शन से दिनांक 12 जुलाई 2014 शनिवार गुरूपूर्णिमा के पावन अवसर पर विद्यारम्भ संस्कार के साथ विद्यार्थीयों को नवनत्नों की संज्ञा देकर, संस्कृत विद्यालय वैदिकविद्यापीठम् में नवागत् विद्यार्थियों की विद्या का श्रीगणेश किया गया। इसी निरन्तरता के चलते हुए विद्यार्थियों की संख्या चैदह भुव की संज्ञा पर 14 विद्यार्थियों से ‘‘स्वामी तिलक वैदिक समिति, चिचोट’’ के कुशल संचालन से सतत् प्रथम वर्ष में प्रथम चरण रख गया।

 

प्रस्तावना
- परम पवित्र नर्मदा के तट पर स्थित
- पूज्य बाबा बजरंगदास जी महाराज की तपोस्थली
- स्वामी तिलक जी की साधनास्थली चिचोटकुटी छीपानेर जिला हरदा मे
- स्वामी तिलक जी की महती इच्छानुरूप
- विद्याभारती एवं संस्कृतभारती मध्यभारत से अनुसिंचित तथा
- संघ विचार से अभिप्रेरित देष के प्रख्यात 9 गुरूकुलों के समान
- ‘‘वैदिक विद्यापीठम्’’ संस्कृत विद्यालय के नाम से स्थापना जो
- पूर्ण ख्याति के साथ, भविष्य में निर्माण करने की महती योजना से
- संस्कृत भाषा के प्रकाण्ड विद्वानों एवं चिन्तकों द्वारा बनाया गया है ।

वैदिक विद्या पीठम् ने उद्देष्यों की पूर्ति करने हेतु निम्नवत् कार्य किये हैं:-

- संस्कृत सम्भाषण की कक्षा, वर्तमान में सभी विद्यार्थीयों ने आश्रम के वातावरण को संस्कृतमय बना दिया है
- 18 स्तोत्रों का कण्ठस्थीकरण कराया गया है । जैसे - श्री नर्मदाष्टकम्, श्री मधुराष्टकम्, श्री अन्नपूर्णास्तोत्रम्, श्री रामरक्षास्तोत्रम्, श्री रूद्राष्टकम्, श्री शिवपंचाक्षरस्तोत्रम्, श्री शिवमहिम्न स्तोत्रम्, श्री शिवतांडवस्तोत्रम्, श्री निर्वाणषटकम्, श्री महिषासुरमर्दिनी ।
- वेदों के ज्ञानार्जन में रूद्राष्टाध्यायी, मंगलमन्त्रः, श्रीगणेषाथर्वषीर्षः, श्रीसूक्तः, पुष्पांजलिः इत्यादि कराया गया।
- ग्रन्थों में ग्रन्थ - श्रीमद्भगवतगीता, सप्तषती एवं मूलरामायण के एक-एक अध्याय अर्थसहित बताये गये ।
- वैदिक गणित की 10 विधियों का ज्ञान कराया गया । निखिलं, न्युनं, अधिकेन इत्यादि ।
- संस्कृत के साथ अंग्रेजी सम्भाषण का भी तीन मासिक षिक्षण कराया गया ।
- मध्यप्रदेष निगम की पुस्तकों का अध्ययनपन कराया गया । जिसमें छः विषय संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सा.विज्ञान है,
- सर्वांगीण विकास हेतु अर्थात् आधारभुत विषय - शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए भी समय निकाल क्रियान्वयन करते हुए सतत् प्रयासरत है ।
- संस्कृतभारती, मध्यभारत द्वारा आयोजित - सरला संस्कृत परीक्षा में 14 विद्यार्थी तथा 1 आचार्य प्रतिभागी हुए ।